तोड़ो न तुम आईने चेहरे हजार दिखेंगे...
अभी तो हम सिर्फ एक है, फिर बेशुमार दिखेंगे...
हिंदी शायरियों और कविताओं का संगम ! स्वरचित कविताएँ !
लम्हों की खुली किताब हैं ज़िन्दगी ….
ख्यालों और सांसों का हिसाब हैं ज़िन्दगी …
. कुछ ज़रूरतें पूरी ,कुछ ख्वाहिशें अधूरी …
.. इन्ही सवालों केजवाब हैं ज़िन्दगी
#आदित्य प्रताप सिंह।।।