Monday, 3 October 2016

HINDI SHAYARI

मत कर इतना गुरूर अपनी इस अथाहता पर समन्दर ..!
 तेरी एक बूँद भी मेरे लबों के काबिल नहीं ।। 

#आदित्य #ONELINER #HINDISHAYRI #SADSHAYARI 

SURGICAL STRIKE POEM



मेरे लोगो पर जहर भरने का तूने जो काम किया होगा ,

मेरा संतरी ही बताएगा फिर तेरे कौम का अंजाम क्या होगा ।।

 #aps #kASHMIR #PAKISTAN #INDIA #URIATTACK #INDIANARMY #SURGICALSTRIKE

oNE lINER lOVE POEM SHAYRI HINDI

उस पार आने का वादा तो मेरा ही है .
 ये सांस रुक रही है ,लहरों से हार के ।।
 तेरा प्यार पाने का इरादा तो मेरा भी है..
 पर काश-काश हो चुके हैं इस पतवार के ।।

काश-काश =टुकड़े-टुकड़े
#आदित्य

#देश_70_का_होया_है

#देश_70_का_होया_है


अखबारों के पन्नो में देखा,
चतुर्थ स्तम्भ कितना रोया है ,
अब तो ख़ुशी मना रे पगले ,
देश 70 का होया है ।।
आजादी संग 'चैन' मिला है ,
इन सफ़ेदपोश कौवाओं को !
गर इस देश का 'सच' देखना है ,
देखो जाकर गांवों को !
गज भर घाटी के लालच में ,
तिरंगा लाल जो होया है !
अब तो ख़ुशी मना रे पगले,
देश जो 70 का होया है ।।
आज़ादी से अब तक में,
बीज 'महाशक्ति' का बोया है !
अब तो ख़ुशी मना रे पगले ,
देश 70 का होया है ।।
'आजादी' तो मिली हुई है ,
मगर कागजी बातों में!
तभी तिरंगा बिकते देखा,
नन्हे नन्हे हाथो में !
जनहित के सब 'वादे' पड़े हैं ,
कब से बंद किताबों में ,
'
जिम्मेदार' भूख मिटाने वाले,
सारे लगे 'हिसाबों' में !
देख जवां होकर भी,
देश मेरा तो सोया है !
अब तो ख़ुशी मना रे पगले,
देश 70 का होया है ।।
मेरा देश है बहुत बलवान ,
सोये तब तक सोने दे !
'
तिरंगा' बेचकर पेट भरने की ,
बातें होती हैं ? होने दे !
कागजों में तो बढ़ रही 'जीडीपी',
किसान रो रहे ,रोने दे !
'
राजनीति' के गलियारे में,
नित दुर्घटनाये होने दे !
देश जगाने की हठ में तू ,
क्यूँ बेतहाशा रोया है ?
अब तो ख़ुशी मना रे पगले,
देश 70 का होया है !
गर देश मेरा कहीं अपनी औकात पे गया ,
तो जग 'सीधा' हो जाएगा !!
'
पाक-चीन' चुप हो जाएंगे ,
'
अमरीका' रो जाएगा !
'
राजनीती' से शर्मशार हो गया ,
'
जन-गण-मन' भी रोया है !
पर तू तो ख़ुशी मना रे पगले,
देश 70 का होया है !
राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज पर भी,
बहस हो रही टीवी पर !
बाकि किसी को क्या 'लेना-देना'
की क्या गुजर रही 'श्रमजीवी' पर !
'
भारत माता की जय' के नारे में भी,
धर्मवाद जो पिरोया है !
राजदीप, बरखा जैसे पत्रकारों ने ,
राष्ट्रवाद भी खोया है !
पर तू तो ख़ुशी मना रे पगले,
देश जो 70 का होया है ।।

Manjhi - Indian

सर रख कर जिसकी गोदी में वर्षो,
सुख दुःख में हंसा व रोया है।
आज बिलखती बेटी के संग वो
हाँ उसी की लाश को ढोया है।।
चार कंधो क्या सुकून क्या होता है
जो इक काँधे ने दिलाया है।
मांझी, मांझी ही बन बैठा देखो
आज जिन्दा लाशों को इसने रुलाया है।।
न ही कोई विद्रोह ह्रदय में
न उम्मीद कोई ज़माने से है।
वादा सात जन्मों का था जो
बस अपना फ़र्ज़ निभाने से है।।
उठा देगा माझी वो सुसुप्त प्रसाशन
जो है गहरी नींद में यहां खोया है।
जब-2 व्यस्था की नींद लगी है,
तब-2 किसी अपने ने अपना खोया है।।
पुत्री के अश्क़ लहू के छलके जो मीलों
जमी को पल-पल वहाँ जलाएंगे।
घाव ह्रदय का और पदचिन्ह वो गहरे
'निरंजन' आसमा से नजर हैं आएंगे।।
~Ram Niranjan Raidas #NiranjanPoems

Sunday, 3 April 2016

फ़िक्र

फ़िक्र

तुझे ही मेरी फ़िक्र है वरना ,
वो देख !,
सारा शहर मोहब्बत को मुझसे और
मुझको महब्बत से जानता है !
तू खुद नाप ले मेरी मुहब्बत का पैमाना !
मेरे शहर के हर मयखाने का प्याला ,
तेरा नाम जानता है !
अब तो मेरी रूह भी वाकिफ है तेरी वफाई से ,
पर ये दिल मेरे अंदर होके भी मेरी बात मानता है !
मैं भी चाहता हूँ तुझे भुला दू तेरी ही तरह !
पर क्या करूँ ,
कुछ इस कदर बस गयी है तू मुझमे ,
की मेरा रोम रोम मुझे अब तुझसे पहचानता है !
सिर्फ एक तू ही है जिसे मेरा प्यार दिखा
वरना सारा शहर मुझे तेरे आशिक़ के नाम से जानता है !
तेरे सिवा मेरे पास कुछ था खोने को ,
पर तेरे जाने के बाद ये शराब का प्याला मुझे संभालता है !
मेरी हालत अब उस शीशे सी रह गई है फकत !
टूट भी जाऊँ सौ टुकड़ो में मगर ,
हर टुकड़ा तेरे अक्स को खुद का गवाह मानता है !

‪#‎आदित्य_प्रताप_सिंह 'अनु'


हजारो टूटते हुए दिलो का गवाह हूँ ,
तभी तो लिखने को इतना बेतरतीब और मुहब्बत से बेपरवाह हूँ ।